हे मेरे गुरुदेव करुणा-सिंधु .. – भजन

21 05 2007

हे मेरे गुरुदेव करुणा-सिंधु करुणा किजीये,
हुं अधम आधीन अशरण, अब शरणमें लिजीये…




खा रहा गोते हुं मैं भव-सिंधु के मझधारमें,
दुसरा है आसरा कोई ना ईस संसारमें,
हे मेरे गुरुदेव करुणा-सिंधु करुणा किजीये…




मुझमें नहि जप-तप व साधन, और नहि कुछ ग्यान है,
निर्लज्जता है एक बाकी, और बस अभिमान है,
हे मेरे गुरुदेव करुणा-सिंधु करुणा किजीये…




पाप बोझे से लदी, नैया भंवर में जा रही…
नाथ दोडो़ अब बचाओ, शीघ्र डूबी जा रही,
हे मेरे गुरुदेव करुणा-सिंधु करुणा किजीये…




आप भी यदि छोड़ देंगे, फीर कहां जाउंगा मैं ??
जन्म-दु:ख से नाव कैसे पार कर पाउंगा मैं ??
हे मेरे गुरुदेव करुणा-सिंधु करुणा किजीये…




सब जगह मंझील भटकली, करली शरण अब आपकी,
पार करना या न करना, दोनों मरज़ी आपकी…




हे मेरे गुरुदेव करुणा-सिंधु करुणा किजीये,
हुं अधम आधीन अशरण, अब शरणमें लिजीये…


Actions

Information

2 responses

23 05 2007
shivshiva

ગુરુપૂર્ણિમા વખતે મારા ગુરુને આ ભ્જન આપીશ. સુંદર છે.

30 05 2007
વિશ્વદીપ બારડ

सुना है अपने गाँव में, रहा न अब वह नीम
जिसके आगे माँद थे, सारे वैद-हक़ीम।

Sundar Bhajan !

Leave a comment