फिर उसी राहगुज़र पर, शायद… – अहेमद फ़राज़

1 02 2008



જગજીત સિંઘે ગાયેલી ખુબ જ સુંદર અને મને ખુબ જ ગમતી ગ઼ઝલોમાંની એક … આ …

फिर उसी राहगुज़र पर, शायद..
हम कभी मिल सकें मगर, शायद…

जान पहेचान से क्या होगा ?
फिर भी ऐ दोस्त गौर कर, शायद…

मुन्तज़िर जिनके हम रहे उनको…
मिल गये और हमसफ़र, शायद…

जो भी बिछडे़ है कब मिले है “फ़राज़” ?
फिर भी तु ईंतज़ार कर, शायद…

- अहेमद फ़राज़



मुन्तज़िर = Expectant, આકાંક્ષી, અપેક્ષા રાખી રહેલ


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