याद क्या तुज़ को दिलाए तेरा पैमान૩ जानाँ…
युँ ही मौसम की अदा देख के याद आया है,
किस कदर जल्द बदल जाते है ईन्साँ जानाँ…
ज़िंदगी तेरी अता૪ थी सो तेरे नाम की૫ है,
हमने जैसे भी बसर૬ की तेरा एहसान जानाँ…
दिल ये कहेता है कि शायद हो फ़सुर्दा૭ तु भी,
दिल की क्या बात करें, दिल तो है नादाँ जानाँ…
अव्वल-अव्वल૮ की मुहब्बत के नशे याद तो कर,
बेपीये भी तेरा चहेरा था गुलीस्ताँ૯ जानाँ…
आख़िर आख़िर तो ये आलम है कि अब होश नही,
रग़-ए-मीईना૧૦ सुलग उठी कि रग़-ए-जाँ૧૧ जानाँ…
मुद्दतों से ये आलम, ना तवक़्को૧૨ ना उम्मीद,
दिल पुकारे ही चला जाता है जानाँ जानाँ…
हम भी क्या सादा૧૩ थे हम ने भी समज़ रखा था,
ग़म-ए-दौराँ૧૪ से जुदा है ग़म-ए-जानाँ૧૫ जानाँ…
अब की कुछ ऐसी सजी महेफिल-ए-याराँ जानाँ,
सर-ब-ज़ानुँ૧૬ है कोई सर-ब-ग़िरेबाँ૧૭ जानाँ…
हर कोई अपनी ही आवाज़ से काँप उठता है,
हर कोई अपने ही साये से हिरासाँ૧૮ जानाँ…
जिसको देखो वही ज़ंजिर-ब-पा૧૯ लगता है,
शहर का शहर हुआ दाख़िल-ए-ज़िंदाँ૨૦ जानाँ…
अब तेरा ज़िक्र૨૧ भी शायद ही ग़ज़ल में आए,
और से और हुआ दर्द का उन्वाँ૨૨ जानाँ…
हम कि रुठी हुई रुत को भी मना लेते थे,
हम ने देखा ही ना था मौसम-ए-हिजराँ૨૩ जानाँ…
होश आया तो सभी ख्वाब थे रेज़ाँ-रेज़ाँ૨૪,
जैसे उड़ते हुए औराक़-ए-परेशाँ૨૫ जानाँ…
- अहेमद फ़राज़
૧तजदीद = ફરીથી તાજું કરવું
૨ईम्कान = શક્યતા
૩पैमान = વાયદો
૪अता थी = આપેલી હતી
૫नाम की = નામે કરી
૬बसर = વિતાવી
૭फ़सुर्दा = નિરાશ, દુ:ખી
૮अव्वल-अव्वल = શરુઆત
૯गुलीस्ताँ = ફૂલોનો બગીચો
૧૦रग़-ए-मीईना = પીનારાની નસો
૧૧रग़-ए-जाँ = ધમનીઓ
૧૨तवक्को = આશા
૧૩सादा = ભોળું
૧૪ग़म-ए-दौराँ = જીવનના દુ:ખો
૧૫ग़म-ए-जानाँ = પ્રિયતમના વિરહનું દુ:ખ
૧૬सर-ब-ज़ानु = ઘુંટણ પર માથુ (નમાઝની સ્થિતીમાં)
૧૭सर-ब-ग़िरेबाँ = ચિંતાતુર
૧૮हिरासाँ = ભયભીત
૧૯ज़ंजिर-ब-पा = બેડીઓથી બંધાયેલા પગ (કેદી)
૨૦दाख़िल-ए-ज़िंदाँ = કારાગારમાં દાખલ થયેલ
૨૧ज़िक्र = ઉલ્લેખ
૨૨उन्वाँ = શીર્ષક, અધ્યાયની શરુઆતનું વાક્ય
૨૩मौसम-ए-हिजराँ = જુદાઈનો સમય
૨૪रेज़ाँ-रेज़ाँ = ટુકડે-ટુકડા થયેલું
૨૫औराक़-ए-परेशाँ = ફાટી ગયેલા પાનાઓ
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अहमद फ़राज़ दौर-ए-जदीद के बड़े शायर हैं।
खराजे-अक़ीदत के रूप में समय सृजन पर
उनकी रचनायें पेश की जा रहीं हैं।
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अब के तजदीद-ए-वफ़ा૧ का नही ईम्कान૨ जानाँ,
याद क्या तुज़ को दिलाए तेरा पैमान जानाँ…
शुभान अल्लाक
आते आते तेरे लब पर जो तबस्सुम बन जाये
उस अदा से कभी हमसे भी हो पैमान कोई
क्या बात है !
होश आया तो सभी ख्वाब थे रेज़ाँ-रेज़ाँ૨૪,
जैसे उड़ते हुए औराक़-ए-परेशाँ૨૫ जानाँ
मालती की बेलें औराक़ पे हर्फ़ों की दीवार से लिपटीं
ख़ुशबू-ए-मिज़ाज रखके यह मेरी आँखों में सिमटीं
This is really nice. Thank you for introducing us to the world of urdu poetry.
each stanza of this poetry is so good.
Thanks again.
युँ ही मौसम की अदा देख के याद आया है,
किस कदर जल्द बदल जाते है ईन्साँ जानाँ…
સાવ સાચું કહ્યું છે અહેમદ ફરાઝ સાહબે, આટલી સુંદર ગઝલ આપવા બદલ કુણાલજી નો આભાર
Thank you very much for appreciating us!
આખે આખી ગઝલ કોઇજ ભરતી ના શેર વગર બની હોય એનું સુંદર ઉદાહરણ
Belated Happy Birthday
thank you very much neelaaunty !!
ghazal kharekhar sundar chhe ane ethi vadhare urdu ni vocab. samrudhh karavama helpful thay evi chhe.
good luck
Hi,
After mirza galib, first time I am reading something so sharp and touching (you have to excuse my limited reading in urdu).. It indeed is a rich one ! Thanks a lot for sharing it with us ..
Hey very nice work.. Mansi said right..”Thank you for introducing us to the world of urdu poetry.”